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गुलमोहर

कमरे की खिड़की से झाँकते हुए शिवांगी के प्रिय गुलमोहर भी आज उसकी बेचैनी को कम नहीं कर पा रहे थे।
मन ही मन अनगिनत प्रार्थनायें दोहराती हुई वो ऑपरेशन थियेटर के दरवाजे खुलने का इंतज़ार कर रही थी, जिसके उस पार उसका पति अमन था।
जैसे ही अमन को ऑपरेशन थियेटर से कमरे में लाया गया, शिवांगी उसकी हथेली थामे एकटक उसे देखने लगी।
कुछ देर बाद धीरे-धीरे अमन ने आँखें खोलकर अपनी पत्नी को देखा और लड़खड़ाती आवाज़ में पूछा- शिवू तुमने कुछ खाया?
और फिर से आँखें बंद कर ली।
इस हालत में भी अपने लिए अमन की फिक्र देखकर अब तक मुश्किल से जब्त किये आँसू शिवांगी की आँखों से बह चले।
किसी तरह खुद को संभालकर वो अमन के पूरी तरह होश में आने का इंतजार करने लगी।
अर्धबेहोशी की स्थिति में अनगिनत बार अमन बस यही एक बात दोहराता रहा।
शायद उसके अवचेतन मन को ये अहसास था कि जब तक उसकी प्यारी पत्नी आश्वस्त नहीं हो जाती की वो ठीक है तब तक वो कुछ खाने वाली नहीं है।
होश में आने पर शिवांगी के हाथों को अपने हाथों में महसूस कर अमन मुस्कुरा उठा।
उसे मुस्कुराते देख शिवांगी भी आँखों की नमी पोंछकर मुस्कुरा उठी।
पूरे जतन से अपनी देखभाल में जुटी शिवांगी को देखकर अमन ने कहा- मैं तुम्हें बहुत परेशान कर रहा हूँ ना शिवू?
उसके होंठो पर ऊँगली रखते हुए शिवांगी बोली- तुम्हें क्या लगता है मैं बस दिखावे के लिए तुम्हें जान कहती हूँ? तुम सचमुच मेरी जान हो।
दर्द के बावजूद इस बात पर अमन मुस्कुरा उठा।
अस्पताल में अमन से मिलने आये कुछ रिश्तेदारों ने तंज कसते हुए कहा- कहाँ नयी-नयी शादी के बाद तुम दोनों को कहीं घूमने जाना चाहिए था और कहाँ तुम अस्पताल में पड़े हो।
इसे सुनकर एक लम्हे के लिए शिवांगी का चेहरा जर्द पड़ गया, लेकिन अगले ही पल खुद को संभालते हुए उसने कहा- मेरे लिए मेरे पति की सलामती पहले है।
उनके जाने के बाद अमन ने कहा- मैं बहुत बुरा हूँ ना? अपना वादा नहीं निभा पाया। खूबसूरत वादियों की जगह तुम्हें यहाँ ले आया।
अमन के बालों से खेलते हुए शिवांगी बोली- बिल्कुल नहीं। तुमने अपना वादा निभाया है मेरे लिए ठीक होकर।
और फिर जहाँ हम दोनों एक-दूसरे के साथ है वही हमारे लिए दुनिया की सबसे खूबसूरत जगह है।
शिवांगी के प्रेम और समर्पण ने अमन की तकलीफ आधी कर दी थी।
तकलीफों से गुजरने के बावजूद मुस्कुराते हुए एक-दूसरे का हाथ थामे, प्रेम में डूबे दो दिलों को देखकर गुलमोहर भी अपनी पूरी रंगत से खिल उठा था।
©शिखा श्रीवास्तव

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